तेरे हुस्न को परदे की ज़रुरत ही क्या है,
कौन होश में रहता है तुझे देखने के बाद…
तु मिल गई है तो मुझ पे नाराज है खुदा,
कहता है की तु अब कुछ माँगता नहीं है
अपने हसीन होंठों को किसी परदे में छुपा लिया करो,
हम गुस्ताख लोग हैं नज़रों से चूम लिया करते है
हमें सीने से लगाकर हमारी सारी कसक दूर कर दो,
हम सिर्फ तुम्हारे हो जाऐ हमें इतना मजबूर कर दो।
नहीं है अब कोई जुस्तजू इस दिल में ए सनम,
मेरी पहली और आखिरी आरज़ू बस तुम हो।
मेरे होंठो पर लफ्ज़ भी अब तेरी तलब लेकर आते हैं,
तेरे जिक्र से महकते हैं तेरे सजदे में बिखर जाते हैं।
क्या चाहूँ रब से तुम्हें पाने के बाद,
किसका करूँ इंतज़ार तेरे आने के बाद,
क्यों मोहब्बत में जान लुटा देते हैं लोग,
मैंने भी यह जाना इश्क़ करने के बाद
जरा सी बदमाश जरा सी नादान है तू,
लेकिन ये भी सच है की मेरी जान है तू।
प्यार मैं तुझसे करती हूँ,
और अपनी जिंदगी से ज्यादा करती हूँ।
तन्हाई में मुश्कुराना भी इश्क है,
और इस बात को छुपाना भी इश्क है।
रात होगी तो चाँद दुहाई देगा,
ख्वाबों में उसका चेहरा दिखाई देगा,
ये इश्क है ज़रा सोच समझ कर करना,
क्यूंकि यहाँ एक आंसू भी गिरा तो सुनाई देगा।
मोहब्बत कभी किसी की इजाज़त की मोहताज नहीं,
ये हमेशा से होती चली आई है,
और हमेशा होती रहेगी।
मेरे दिल के किसी कोने में अब कोई जगह नहीं,
कि तस्वीर-ए-यार हमने हर तरफ लगा रखी है।
प्यार मैं तुझसे करती हूँ,
और अपनी जिंदगी से ज्यादा करती हूँ।